वह एनाट्रोपस डिंब कोशिका का ढाँचा, जहाँ बीजांडद्वार माइक्रोपाइल के नीचे होता है और फ़निकलस उसके साथ लम्बवत चलता है, और सात-कोशिकीय आठ-केंद्रकीय भ्रूणकोष — ये सब मैं रटता हूँ रोज़ सुबह बालकनी पर, मुरली के रियाज़ के बीच। पर यह किताबी ज्ञान उस गहरी समझ जैसा नहीं, जो एक राग के सुरों की बनावट में छुपी होती है। क्या ज़िंदगी की परीक्षा सिर्फ़ याद रखने से पास हो जाती है?
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