बोर्ड का सवाल पूछता है, "यह क्या है?" जबकि JEE पूछता है, "अगर ऐसा हो जाए, तो यह क्या होगा?" वो तुम्हारी समझ को उलझाकर देखते हैं। मेरी बात समझो, मेरे दोस्त ने बोर्ड में 95% लाया, पर JEE की तैयारी में उसी ऑर्गैनिक के नाम से रोता था! असल में, मुझे तो यह रोज़ सुबह मेरे कंपोज़िशन के वक्त समझ आया – साधारण राग देना आसान है, पर उसे नए ताल में बाँधना ही असली परीक्षा होती है।
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