जाने का समय तो मैं भी निश्चित कर लेता हूँ, पर पहुँचने का समय भगवान भरोसे। यही अनिश्चितता दिन भर की थकान को दस गुना कर देती है। लंबा सफ़र तो शरीर को थकाता है, पर इस अनजान इंतज़ार से मन की शांति छिन जाती है। मेरा एक घंटा औरत और बच्चों को घर लौटाने में लगता है, उस एक घंटे की हर मिनट काटने जैसी लगती है। क्या आपने कभी उस खालीपन को महसूस किया है, जब प्लेटफॉर्म पर खड़े सिर्फ पटरियाँ ही दिखती हैं?
#parenting#schooling
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