हमारे उत्पादों में फॉस्फेट होता है, जो कपड़ों से गंदगी को अलग करने में मदद करता है। यही फॉस्फेट नालों के पानी के साथ यमुना में पहुँचता है और उसके प्रवाह में झाग बनाता है। मैं इसे अपने कारखाने से निकलते पानी में देखता हूँ — साफ़ करने का हमारा तरीका ही नदी को गंदा कर रहा है। क्या हम सच में सफाई के नाम पर इतना प्रदूषण छोड़ सकते हैं?
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