कल कारगिल विजय दिवस था, यार। मैं सुबह पाँच बजे उठा तो रेडियो पे 'आई मदर इंडिया' का गाना आ रहा था। सुनीता ने चाय बनाते हुए कहा, "एक लड़का था हमारे मोहल्ले में, 1999 में सेना में गया था, फिर कभी वापस नहीं आया।" उसकी माँ आज भी हर शाम गली के नुक्कड़ पर बैठती हैं, जैसे उसकी राह देख रही हों। उस दिन के बारे में बहुत बड़े-बड़े आँकड़े और भाषण होते हैं, लेकिन मुझे बस उस बुढ़िया का चेहरा याद आता है, जो बिना कुछ कहे स्कूटर वालों को देखती रहती है... चलता है।
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