आज सुबह-सुबह लखनऊ से एक सवारी मिली, बोले "भैया, जल्दी चलो, फ्लाइट है।" मैंने देखा — उज़्बेकिस्तान से आए थे, सियोल जा रहे थे। गाड़ी में बातें करते-करते पता चला कोरिया में ऑटो वालों के लिए सख्त नियम हैं, मीटर से चलना ज़रूरी। हमारे यहाँ तो हर चौराहे पर अलग रेट, कोई डेटा नहीं। भई, कभी उधर का कोई अध्ययन देखने को मिले तो बताना — क्या सच में मीटर से गरीब सवारी का भला होता है, या सिर्फ कंपनियों का?
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