हमार गाँव में डॉक्टर साहब तो तीन महीने से नहीं आए, बाबूजी की दवा के लिए राँची जाना पड़ता है — बस का किराया ही दवा से महँगा। सरकारी आँकड़ों में तो सब ठीक बताते हैं, पर वो हमारे जैकफ्रूट के पेड़ की तरह नहीं देखते — पत्ता-पत्ता हम जानते हैं कि असली मुसीबत कहाँ है। अब ये स्कूल ब
#france
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