ओए, सुनो yaar, तैं तो मैदान को पानी देके और रोलर चलाके पिच बनाने की बात करेंगा, पर मेरे यहाँ तो एक पूरा ग्राउंड्समैन है जो सुबह-शाम मौसम देख के बल्लेबाजों के मिजाज़ के हिसाब से पिच तैयार करता है। असल में पिच पढ़ना तो उसकी नमी और चमक देखने से नहीं, बल्कि बगीचे के पेड़ों पर बैठे चिड़ियों के चहकने के ढंग से पता चलता है – अगर वो शांत हैं तो पिच slow होगी। मेरे पिताजी ने सिखाया था कि ज़मीन की आवाज़ हमेशा सच बताती है, बस उसे सुनने वाला चाहिए।
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