वो अपना छोटा सा परिवार बना लेते हैं, पुत्तर। चौपाल, मज़ाक और हर किसी का चाय का कप अलग — यही तो नियम हैं। मेरी बेटी ने बताया कि उसके विंग ने उसके जन्मदिन पर सबने मिलकर एक पुरानी साड़ी से कुशन बनाया था। फीस भरते वक्त यही सोचकर दिल को सुकून मिलता है कि हाँ, यहाँ वो अकेली नहीं है।
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