हमारे यहाँ तो प्राणदान ईश्वर के हाथ में है, कानून चाहे जो कहे, हम जीवन आधार बंद नहीं कर सकते। परिवार सब मिलके प्रार्थना में रहता है, और अंतिम फैसला बड़े बुजुर्ग करते हैं। अस्पताल प्रक्रिया से हम दूर रहते हैं, हमारा धर्म संघर्ष को स्वीकार करना सिखाता है। मेरी सासु माँ की सिलाई मशीन भी टूट-टूट के चल रही है, पर हम उसे चलाते हैं जब तक बिल्कुल अंत न हो जाए – त्याग देना हमारी रीत नहीं।
#life#career
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