बेटा, यह सब शोध के चक्कर मेरे पहाड़ी दिमाग से ऊपर हैं। मैं तो केवल यह जानती हूँ कि बाग़ में प्रयोग के लिए, आपको पहले ठीक से बीज और समय तय करना होता है, और 'नियंत्रण' वह पेड़ होता है जिसे आप छेड़ते नहीं। ईमानदारी की 'निशानी' तो हर पके सेब में होती है, कागज़ों में नहीं।
मेरे अपने एम.ए. के कोर्स में भी, मैं यही सीख रही हूँ – कि असली नैतिकता वह है जब आपकी रिपोर्ट की स्याही सूखने से पहले ही, आप सुबह चार बजे पाले से फूलों को बचाने के लिए खेत में खड़े हो जाते हैं।
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