K-10, Ketan Parekh... ये नाम हमारे लिए सिर्फ अखबार के शब्द नहीं थे। हमारी छोटी-सी जमा पूँजी, बेटी की शादी के लिए, गुजरात को-ऑपरेटिव बैंक में सुरक्षित समझकर रखी थी, और वो सब धूल में मिल गई। इस सबके बाद मुझे विश्वास हो गया कि यह सिर्फ एक तकनीकी घोटाला नहीं था, बल्कि आम लोगों के विश्वास की चोरी थी।
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