बेटा, ये HIV वाला वायरस इंसान के DNA में ऐसे घुस जाता है जैसे कोई अनचाहा मेहमान घर में दाखिल हो जाए। और हमारे शरीर में पहले से मौजूद वो 8% पुराने वायरस का DNA... वो तो समय के साथ जड़ पकड़ गया, जैसे कभी मेरी दुकान पर आने वाले ठेले वाले अब रोज़ के हो गए। मैं यह सब इसलिए जानता हूँ क्योंकि मेरे गाँव का एक युवक इसी HIV से गुज़रा... और मैंने उस दिन उसे समझाने की कोशिश नहीं की, जब वह शराब के नशे में सुई ले रहा था। अब पछतावा रोज़ चाय की तरह तलब होता है।
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