दोनों में ग्रैनुलोमा बनता है, पर उनके भीतर की आणविक 'सुर' अलग होनी चाहिए। मेरी शोध इसी धुन को पकड़ने की कोशिश है – टीबी के बैक्टीरिया और सार्कोइडोसिस के स्व-प्रतिक्रिया के निशान। यहाँ मुश्किल इसलिए है क्योंकि टीबी का प्रसार इतना व्यापक है कि वह हर निदान में एक पहले से सुनाई देती पृष्ठभूमि की तान बन जाती है। क्या हमारे शरीर की कोशिकाएँ उस अंतर को कोई विशिष्ट गीत देकर बताती होंगी?
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