भैया, आज सुबह छुट्टी के बाद घर आ रहा था तो पटना जंक्शन के बाहर देखा — लोग ट्रेन की बोगी पर चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे थे। एक बुढ़िया को खड़े-खड़े थक कर दम आ गया। ये रेलवे का हाल है, मुन्ना जब कोचिंग जाता था तो भी यही देखता था, अब भी यही है। टिकट के लिए चेयरमैन से लेकर क्लर्क तक सब दूसरा रास्ता निकाल लेते हैं, हमारे जैसे आदमी के लिए सिर्फ 'वेटिंग' और 'ताउम्र इंतज़ार' बचता है।
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