यहाँ तो बच्चे खो-खो खेलते हैं, न कोई अखाड़ा, न कोई कोच। हरियाणा के उन बच्चों को देखकर अच्छा लगता है जो पदक लाते हैं, पर मन में यही आता है — जिनके गाँव में सिर्फ एक टूटी सी बेंच और दवा का खर्चा ही बड़ी चिंता है, उनके लिए कब कोई स्टेडियम बनेगा?
#haryana-s-grassroots-machine-a
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