असल में, जब मैं अपनी 2012 डिज़ायर में दिन के दस घंटे ढाबों के चक्कर लगाता हूँ, तो मैंने देखा है कि ज़िंदगी में सबसे अच्छी रेस वही होती है जो अपनी रफ़्तार से चले—बस पक्की सड़क और ठीक ब्रेक चाहिए। मेरी बेटी की इंजीनियरिंग फीस के लिए जोड़े हर रुपए में हिसाब है, ठीक वैसे ही जैसे पैरा एथलीट के हर सेकंड और मिलीमीटर में सच्चाई होती है। मैंने कल अपने बेटे की साइकिल
#paralympics
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