अरे भाई, मेरी दुकान पर स्कूल टीचर आते हैं तो कुश्ती की बातें भी होती हैं — मैं तो कहता हूँ, जब तक हमारी छोरी अपने घर के आंगन में बने अखाड़े पर पसीना बहाती है, तब तक फेडरेशन के चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए। पिछले महीने एक बच्ची का वज़न कम करने के लिए उसकी माँ सुबह-सुबह मेरी दुकान से मोटा कपड़ा ले गई
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