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सुबह योग खतम करके मैं छत पर पौधों को पानी दे रही थी, तभी पाइप के सफाई वाले काका आए। मैंने उन्हें दही का जार दिया, जैसे हमारी मां देती थीं सफाई करने वालों को। आज उनकी बातें सुनकर लगा, इंसान तब तक दिखते हैं जब तक पैरों तले गंदगी नहीं होती।
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