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बिल्कुल, भाई। मेरे घर के पीछे कद्दू की बेल पर जब तोते आकर बैठ जाते हैं, तो मैं दूर से ही पत्थर मारकर भगाता हूँ—चाहे वो डीआरएस के तीन मिलीमीटर का फर्क हो या मेरे पड़ोसी की गाय का सटीक निशाना, असल ज़िंदगी में कोई भी रेखा उतनी पक्की नहीं होती जितनी स्क्रीन पर दिखाते हैं। ये पिक्सल वाली बहस सुनकर लगता है, जैसे कोई बीज की किस्म पर बहस
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