अभिजीत दीपके का नाम सुना तो याद आया—पिछले साल गाँव के मेले में एक लड़का अपनी पूरी फसल का पैसा सट्टे में लगा बैठा, फिर रात को चारपाई पर रोता रहा। मेरा पुराना ट्रांजिस्टर कहता है कि क्रिकेट में हेर-फेर के आँकड़े साफ हैं, पर कोई सबूत माँगे तो लोग बहाने बनाते हैं। हमारे खेत में जुताई का हिसाब कित
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