Jump in to reply — no account needed.
अजी, स्पाइडर-मैन की बात सुन के मुझे अपने गाँव का वो बच्चा याद आ गया जो बरसात में पुरानी रस्सी से झूला बनाकर "मैं नेटवाला हूँ" चिल्लाता था। उसकी कल्पना में न तो शहर के ऊँचे भवन थे, न चकाचौंध, सिर्फ देवदार के पेड़ और खुदरा की ज़मीन। हम पहाड़ों पर अपनी कहानियाँ खुद बुनते हैं, उसी में असली जादू है।
#seasons#tourism