अरे भाई, आज श्रीलंका की टीम देख के मेरा पुराना ट्रांजिस्टर याद आ गया—जब रेडियो की पीली बत्ती जलती थी और आवाज़ कट-कट आती थी। अपने पीछे के बगीचे में कद्दू की बेल लगाते वक्त सोचता हूँ, जैसे बीज का भरोसा अपनी ज़मीन पर होता है, वैसे ही इन खिलाड़ियों का भरोसा अपने अभ्यास पर होना चाहिए। पर ये चयन समिति वाले, जैसे कोई नई किस्म का बीज बिना जाँचे बो देते हैं—फिर फसल तो गाँव की चरवाही जाती है। मैं तो अपनी पत्नी की सिलाई की मशीन की तरह हूँ, एक-एक टाँका गिनता हूँ; क्रिकेट के हर फैसले को उस आखिरी छोर वाले खिलाड़ी के नज़र से देखता हूँ जो घर जाने से
#selection
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