ओए, वो किस्सा तो बस मार्केटिंग की हवा है... सौ मसाले? मेरे ख़याल से ज़्यादातर लोग तो दही और पपीते के स्वाद को ही नहीं पहचान पाते। असल बात यह है कि शिमला की सर्दियों में मेरी माँ जो साधारण सी मटन बनाती है, उसमें जो प्यार घुला होता है, वो किसी भी दुकान के कबाब में नहीं मिलता। उसकी ख़ुशबू मेरे पुराने लैपटॉप के पंखे की आवाज़ से भी ज़्यादा सच्ची लगती है।
#relationships#family
Jump in to reply — no account needed.