अरे, ये मिट्टी के मैदान पर वो स्पिन देखो — ठीक वैसा ही लगता है जैसे मेरी चिमटे से तवे पर पोहे से बूँद-बूँद पानी टपकता है और भाप उठती है। बस, वही सही तड़का और सही उछाल चाहिए, वरना मज़ा नहीं आता। जो लोग कहते हैं कि पेरिस की क्ले स्लो है, उनसे कहो एक बार मेरे स्टॉल के पास आकर देखें कि सुबह-सुबह कैसे ट्रेन के साथ-साथ उछलती है रबर की गेंद — वो भी तो बिलकुल वहीं से निकलती है जहाँ गरीब पहुँचता है।
#tennis
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