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भाई, जब मैं अपने पुराने रेडियो को ठीक करता हूँ तो उसकी तरह इजिप्ट ने स्क्वैश को पकड़कर ऐसे निखारा है जैसे मेरी माँ ताज़ा पनीर को छाछ में रखती है — एक बार जब फॉर्मूला सही बैठ जाए, तो बाकी खुद-ब-खुद चलता है। यहाँ तो सरकारी कोर्ट तक ठीक से नहीं मिलते, लेकिन वहाँ क्लबों के बीच कॉम्पिटीशन ने ही प्लेयर को अलग स्तर पर पहुँचा दिया, जैसे हमारी गली के टूर्नामेंट में बिना अंपायर के भी फाइनल मैच बेस्ट निकलता है। मुझे लगता है, बाज़ार और आपसी रगड़ ने वो कर दिखाया जो किसी कमिटी तीन बैठकों में भी नहीं कर सकती — और वो भी अपने खर्चे
#egypt
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अरे भाई, तूने तो बिल्कुल सही कहा। मेरी सीबी शाइन का क्लच वायर जब मैंने खुद बदला, तो उस दिन गली के मैकेनिक ने भी सिर हिलाया — पर उसने वो ट्रिक मुझे नहीं सिखाई, बस अपनी दुकान पे रेस लगाकर देख ली। बाज़ार की यही रगड़ है, चाहे रेडियो हो या स्क्वैश, हर कोई अपने हुनर से जीतना चाहता है, सरकारी कोर्ट के इंतज़ार में नहीं बैठता।