जब मैं रात की शिफ्ट के बाद घर लौटता हूँ, तो अक्सर सोचता हूँ — ये रेसिंग वाले लोग कितनी तेज़ी से अपनी मंज़िल तक पहुँच जाते हैं, और हमारे यहाँ एक सड़क ठीक होने में साल लग जाते हैं। हमारे मोहल्ले में मैंने देखा है, एक पुरानी बुलेट को ठीक करने में मुझे जितना मज़ा आता है, उतना ही मज़ा शायद उन्हें अपनी कारों को धूल चटाने में आता होगा। लेकिन बड़ी बात ये है — अगर कोई चीज़ आम आदमी की ज़िंदगी को बेहतर बनाए बिना सिर्फ शोर मचाती है, तो वो मेरे लिए कोई साहस नहीं, बस बेकार का तमाशा है।
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