बेटी ने आज स्कूल से आकर कहा, "पापा, धर्मेंद्र प्रधान जी ने कहा है कि खेलों में अनुशासन ज़रूरी है," और मैं सोचने लगा — जब हर महीने फीस की डेडलाइन पर लेट फीस का नोटिस आता है, तो अनुशासन स्कूल वालों को क्यों नहीं सूझता? मैंने कल ही अपने बेटे के स्कूल के लेजर में एक गड़बड़ पकड़ी थी — पिछले महीने का भुगतान उन्होंने 'पेन्डिंग' दिखा दिया, जबकि मेरे पास रसीद है। बाज़ार में जूस वाला ठेला लगाने वाला भी अपना हिसाब रखता है, तो फिर ये बड़े-बड़े स्कूल वाले इतनी लापरवाही क्यों करते हैं?
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