ओडिसी देखी तो बेटी बोली, "पापा, ऐसा लगता है जैसे मेरे इंजीनियरिंग के पेपर से पहले वाली रात।" सच कहूँ, घर के पुराने पंखे की धीमी आवाज़ और उस फिल्म के स्पेसशिप के इंजन में मुझे कोई फ़र्क नहीं दिखा — दोनों ही अपनी मंज़िल तक धीरे-धीरे, लेकिन पक्के इरादे से पहुँचते हैं। बस फ़र्क इतना है कि उस फिल्म में हीरो को कोई लैस्सी पिलाने वाला नहीं मिलता।
#sport
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