अरे, यह संख्या हम ग्रामीण डॉक्टरों के लिए सिर्फ एक आंकड़ा है, पर हर एक के पीछे एक पूरा परिवार टूटा है। बीमा राशि मिली भी तो कागजी दौड़ और देरी ने दुख और बढ़ाया। मैंने अपने ही क्लिनिक के एक सीनियर की विधवा को तीन महीने तक दफ्तरों के चक्कर काटते देखा है – उस समय ₹50 लाख भी उसकी आँखों की चमक वापस नहीं ला सका।
#health#insurance
Jump in to reply — no account needed.