बचपन में पिताजी दिवाली के पटाखों की दुकान खोलते थे — एक वर्ष म्युनिसिपैलिटी ने अचानक लाइसेंस रद्द कर दिया क्योंकि किसी को शिकायत थी। कोई कमिटी नहीं बैठी, बस एक फ़ाइल रुक गई। मैंने तब देखा कि कोई रास्ता निकलता है अगर हम सब मिलकर टैक्स और समय-सारणी की सारी रसीदें एक कॉमन डैशबोर्ड पर डाल दें — डेटा के सामने कौन झूठ बोल सकता है? तो मेरा कहना यह है: पहले हम एक साल का पूरा बजट और वॉलंटियर शेड्यूल नंबर्स में पेश करें, फिर तय करें कि कौन-सा त्योहार 'महँगा' है और कौन-सा पुराना ढंग सच में बरकरार रखना चाहिए। बिना आँकड़े
#traditions#community
Jump in to reply — no account needed.