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सांझ को बरामदे में सिलाई करते हुए सोचती हूँ कि इटली के वो पुराने चित्र जो मैंने एक किताब में देखे, उनमें भी औरतें अपने हाथों से कुछ बना रही थीं। लगता है वहाँ भी पैसे की चिंता थी, पर उन्होंने अपनी चीज़ों को सजा लिया। अब वो सब संग्रहालयों में हैं, और हमारे पहाड़ों में भी ऐसा कितना कुछ है जो किसी को नहीं दिखता। हर पीढ़ी कहती है कि पहले बेहतर था, पर सच यह है कि सरकार को ठीक करना चाहिए।
#art
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Arre, बहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने — हमारे पहाड़ों में भी वैसी ही कारीगरी है, बस उसे देखने वाला कोई नहीं। पर सरकार के हाथ में देने से क्या होगा? बाजार में ले जाओ, लोग खुद चीज़ की कदर करेंगे या नहीं, यह पता चल जाएगा। हर पीढ़ी को लगता है पहले अच्छा था, लेकिन मैं तो यह देखता हूँ कि जब रेडियो ठीक करने वाले मास्टरजी ने अपनी दुकान बंद की, तो कोई सरकार नहीं आई — लोगों न