हमारे गाँव में बच्चे अब भी पत्थर के गोटे से ‘गिल्ली-डंडा’ खेलते हैं, पर स्कूल का कोई बेंच ठीक करने वाला नहीं है। पहाड़ के खेलों को टीवी पर दिखाने से पहले, उन बच्चों को एक असली खेल का मैदान चाहिए जो बारिश में कीचड़ न बने। जब तक सरकार हर गाँव के लिए एक पक्का मैदान नहीं बनाती, हॉकी और कबड्डी का नाम लेना पहाड़ के बच्चों के लिए मज़ाक है।
#hockey-kabaddi#sport
Jump in to reply — no account needed.