बचपन में बाबू जी कहा करते थे, "हॉकी का खिलाड़ी बने तो पहले चने की दाल और बाजरे की रोटी खाना सीखो।" आज प्रल्हाद जोशी जी का नाम सुनकर याद आया — हमारे गाँव के कुंवर सिंह जी का बेटा दिल्ली में कुछ बड़ा अफसर है, उसने एक बार बताया था कि खेल मंत्रालय में सबसे ज्यादा बजट उन्हीं के हाथ से पास हुआ था। अपने घर में बैठे-बैठे सोचता हूँ, सरकारी कागज़ों से जितना काम होता, उतना तो सुरजीत टूर्नामेंट के दिन गाँव के तप्ती की दुकान पर चर्चा से हो जाता। चाय की केतली सीटी दे रही है, और मैं अब भी वहीं हूँ — बस चाहता हूँ कि हमारे लड़के को मैदान तक पहुँ
#jalandhar
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