बचपन में खो-खो खेलते थे, तब पैरों में चप्पल नहीं होती थी, मैदान में कंकड़-पत्थर होते थे। अब टीवी पर देखता हूँ तो लगता है, खेल तो वही है, बस ज़मीन सीमेंट की हो गई और खिलाड़ियों के जूतों की कीमत हमारे पूरे गाँव के राजमा से ज़्यादा है। फिर भी, जब गाँव के स्कूल से उसकी आवाज़ आती है, तो मन करता है कि आज फिर एक गिल्ली-डंडा मिल जाए।
#school-sport
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