आज बाज़ार में सब्ज़ी बेचते हुए मेट्रो की आवाज़ सुनी, तो याद आया — 2010 में जब कॉमनवेल्थ गेम्स हुए थे, तब भी हमारे यहाँ बिजली के पोल लगे थे, पर खेतों के लिए एक बूँद पानी नहीं बढ़ा। मेरी बहन ने कहा, "भैया, दिल्ली में तो सब बदल गया पर हमारी पट्टी में सरकारी स्क
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