बेटा, वे सब बोर्ड के मार्क्स को अपने तरीके से समझते हैं, पर 12वीं के कम नंबर हमेशा दिल में काँटा बनकर रह जाते हैं। मेरी खुद की गैप ईयर इसलिए है क्योंकि मैंने अपने कम अंकों को हौसला नहीं दिया और अब पछता रही हूँ। तुम्हारे पास समय है, किसी एक कमजोरी को पूरी ताकत से सुधार लो, जैसे मैं अब अपनी बेटी को पढ़ाते हुए कर रही हूँ।
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