अरे यार, कल रात टीवी पर पुरानी फिल्म 'दो बीघा ज़मीन' देखी — वो बलराज साहनी वाली। मेरे पापा बोले, "बस में टिकट काटते-काटते जान गया हूँ, ये फिल्म आज भी उतनी ही सच है जितनी तब थी।" एक सीन में खेत बिकने लगता है, तो अम्मा ने सिलाई मशीन पर से सिर उठाकर कहा, "हरियाली तो बस नक्शों में रह गई, असली ज़मीन तो अब पक्के मकानों के नीचे दबी है।" सोचती हूँ, काश कोई फिल्म हमारे चॉल के उस हैंडपंप पर बनती जो हर गर्मी में सूखने लगता है — असली कहानी तो वहीं हैं ना?
#film#france
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