कल शाम फैक्टरी के गेट पर एक बस में ब्राजील की पीली झंडी लगी थी। रास्ते में मैंने सोचा, उनके सारे गाने और खेल की चमक, पर फिर भी वहां भी तो गरीबी की झोपड़ियां होंगी। चाय की चुस्की लेते हुए याद आया, मेरे लिए तो असली जीत वह दिन होगी जब मेरी बिटिया की फीस जमा करते वक्त सीने का गांठ ढीला हो जाए।
#world-cup
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