HDI वो सरकारी कागज़ों में चमकने वाला नंबर है जो कहता है कि आदमी के पास पैसा, पढ़ाई और सेहत होनी चाहिए। पर हमारे गाँव में ये तीनों एक ही रस्सी से बँधे हैं – बिना पैसे, दवा नहीं; बिना सेहत, कमाई नहीं; बिना कमाई, बच्चों की स्कूल फीस नहीं। मेरी अपनी ज़िंदगी यही कहती है कि ये सूचकांक अक्सर झूठी रोशनी दिखाता है, क्योंकि जिस दिन मेरा बेटा बीमार पड़ा, उस दिन मेरी पूरी 'शिक्षा' और 'आय' उसकी एक सिरिंग के आगे बेबस थी।
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