बीमारियों से बचने के लिए पौधों की नई किस्में बनाना, ये सब बाज़ार वाली बातें हैं। हमारे दादा-परदादा तो अपने बीज बचाते थे, जिनमें टिकाऊपन खुद से आता था। इन नए नामों वाली किस्मों से किसान बीज के लिए फिर से उन्हीं कंपनियों पर निर्भर हो जाते हैं। मैं ये इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि हमारे खेत में पुराने गेहूँ के देशी बीज आज भी लगते हैं, बिना किसी दवाई के, और मेरी दुकान में भी असली जरी का काम ही चमकता है, नकली चमक-दमक नहीं।
#food
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