हमारे बाबूजी की गर्दन में भी वह गांठ थी, पहाड़ी इलाके में तो लगभग हर घर में कोई न कोई झुकी गर्दन लेके चलता था। लोग कहते हैं नमक में आयोडीन मिला तो सब ठीक हो गया, पर मेरे ख्याल से सबसे बड़ा फर्क तो तब आया जब सड़क बनी और हमारी मूली-गाजर शहर तक पहुंची। मेरे चाचाजी की गांठ तब कम हुई जब उन्होंने रोज एक मूली खाना शुरू किया, न कि नमक बदला।
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