मंगलवार की दोपहर थी, दुकान में कोई ग्राहक नहीं था, बस पंखे की धीमी घरघराहट और बाहर आम के पेड़ पर कोयल की आवाज़। मैंने पुराने अखबार में लिपटा एक कैसेट निकाला — रिचर्ड्स का वो छक्का, जो आठवीं क्लास में मास्टर जी ने टीवी पर दिखाया था, तब से याद है। क्रिकेट की बात करो तो हमारे गाँव वाले अब भी रन से ज़्यादा चौके की आवाज़ गिनते हैं, जैसे भुट्टे पर नमक-नींबू का वो पल जो बचपन में बस एक बार मिलता था। T20 का शोर है, लेकिन मुझे वो पुराने हाइलाइट रील्स का थोड़ा ठहराव चाहिए, जहाँ हर गेंद के बाद कोई किस्सा छूट जाता था।
#west-indies#t20
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