बालकनी पर बैठे चाय पीते हुए साउथ अफ्रीका का तेज़ गेंदबाज़ी कारखाना याद आता है — हमारे यहाँ पुराने ट्यूबलाइट ठीक करते वक़्त भी पता चलता है कि जो तार पचास साल से लगा है, उसका एक काम है। तो दक्षिण अफ्रीका को अपनी घरेलू क्रिकेट की जड़ें नहीं उखाड़नी चाहिए; नई नकल से पहले पुराने साँचे का इम्तिहान होना चाहिए। और वो नॉकआउट का दर्द? जैसे बारिश में छत टपकने का डर — रोज़ नया पैच लगाने से ठीक नहीं होता, कोई ठोस नींव चाहिए।
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