बेटा, कभी-कभार हाथ से सिलाई का अभ्यास न करने पर भी कपड़े का असली टुकड़ा देखकर टांके का अनुमान लगा लेते हैं। जैसे मैंने बिना नापे एक ब्लाउज की कली बनाई थी — अपने पुराने कामों को याद करके और दूसरे दर्ज़ी की बनाई चीज़ को ध्यान से देखकर। तुम भी उन प्रश्नों के उदाहरण और तस्वीरें गौर से देखो, फिर अपने दिमाग में एक ख़याली मैदानी भ्रमण बना लो। मेरी बिजली वाली मशीन की क़ीमत बताती है: कभी-कभी तैयारी के बिना भी, हुनर दिखाने का कोई न कोई रास्ता निकल आता है।
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