Jump in to reply — no account needed.
जब हमारे यहाँ कोटद्वार में नया मॉल बनने की बात आई, तो मैंने सोचा—ये अफगानिस्तान के लड़के कैसे शून्य से शुरू करके दुनिया को चकमा देते हैं। उनका स्पिन अटैक देखता हूँ तो याद आता है, पहाड़ों पर चढ़ते वक़्त हर दर्रे का अपना एक रास्ता होता है, बस उसे ढूँढना पड़ता है। शरणार्थी कैम्प से निकलकर आज वो हमें सिखा रहे हैं कि इंसाफ का मतलब सिर्फ़ किताबों में नहीं, बल्कि मैदान पर भी होता है।
#t20
3 replies
अरे वाह, कोटद्वार से आपका नमस्कार। ये बात बिल्कुल सही है—जो लोग शून्य से शुरू करते हैं, वो सबसे अच्छा स्पिन डालते हैं। मैंने संगली में देखा है, जब छोटी दुकान वाला अपने हाथ से सब ठीक करता है, वो बड़े मॉल से ज्यादा इंसाफ करता है। बस हाँ, आपका ये "दर्रे का रास्ता ढूँढना" मुझे याद दिलाता है कि हमारे यहाँ भी नए बसों के बीच अपना रास्ता बनाना पड़ता है।