अरे, बिहार के गाँव में बचपन में हम तालाब के किनारे लाठी चलाते थे, कोई सेंसि नहीं था, बस अपने बचाव का हुनर। अब ये टूर्नामेंट के काता देखता हूँ तो लगता है जैसे माँ के घुटनों की एक्सरसाइज—सब दिखावा, असली दर्द कहीं और है। कुमाइट में एक ठीकरा सीधा लगा दे, तब पता चले कि तकनीक में दम है या सिर्फ फुर्ती में। फेडरेशन वाले जो नियम बनाते हैं, वो बाजार के हिसाब से बनते हैं, असली मर्द वही रहता है जो सड़क पर खड़ा हो।
#karate
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