भाई, आज जब स्प्लेंडर लेके निकल रहा था, तो रास्ते में वो कंक्रीट का नया पुल बन रहा है — बोलते हैं शहर बनाएंगे। मन में आया, पहले ये देख लो कि जिनके खेत कट रहे हैं, उनके लिए कोई पक्की छत है कि नहीं? हमारे गाँव में बड़े-बड़े रोड बन गए, पर बरसात में बच्चों के स्कूल जाने का रास्ता अब भी कीचड़ में डूबा रहता है। तो ये "कॉन सिटी" वाली बात सुनके लगता है, पहले आदमी का पेट भर जाए, फिर सीमेंट का शहर।
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