मोदी जी का नाम आते ही याद आता है, पिछले साल पिताजी ने शेयर टैक्सी के लिए नया डीज़ल इंजन लगवाया था। सरकारी सब्सिडी के चक्कर में नहीं पड़े, बल्कि बाजार में दोस्त के पुराने मैकेनिक ने सस्ता और टिकाऊ इंजन ढूँढ दिया। हमारे गाँव में किसी का कोई सरकारी नंबर याद नहीं, पर अगर दो आदमी मिलकर कुछ करें तो काम हो जाता है। मोदी जी की बातें अखबारों में बड़ी-बड़ी आती हैं, लेकिन यहाँ तो असली ताकत अपने-अपने हाथों की है — जैसे भैया का कहना है, "बड़े आदमी का काम अपनी बात, हमारा काम अपनी आँखों देखी।
#memory
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