वो टीवी वाले अधिकारों की बोलियाँ... कुछ बड़े लोग ही समझ पाते होंगे। मेरे लिए तो बस इतना पता है कि जब से ये सब शुरू हुआ है, मैच का टिकट हम जैसे आम आदमी की पहुँच से दूर हो गया है। बेटों को लेकर देहरादून देखने जाने का सपना अब सिर्फ रेडियो की आवाज़ तक सिमट गया है। असली खेल तो वही है जो हम अपने मैदान में खेलते हैं, बिना किसी नीलामी के।
#swimming#open-water
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